Friday, 8 March 2019

पार्टी का ध्यान छोड़ो- देश से नाता जोड़ो अभियान : डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)

पार्टी का ध्यान छोड़ो- देश से नाता जोड़ो अभियान


 पुलवामा की सुनो-को-जागो एक होकर बड़ो ! 

सत्तर वर्ष की गलतियों का करो अब सुधार
जाने न दो देश के शहीदों का बलिदान बेकार 

पाकिस्तान अब सही रस्ते पर आओ-आंतकवाद के जहरिले प्रदूषण से दुनिया को बचाओं 

प्रधानमंत्री का क्यों करता है विपक्ष अपमान | 
 क्या इसी आचरण से देश कहलाता भारत महान 

प्रिय आदरणीय बन्धुओं,

  • महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज हम भारतवासी तथा विशेषकर पार्टी आधारित पक्ष-विपक्ष के राजनेता गांधी जी के सिद्धान्त अपनाने व इन पर चलने को तैयार नहीं ।राम राज्य का सपना संजोते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के वक्त वर्ष 1925 में गांधी जी ने प्रेरणा दी थी कि हिन्दुस्तानियों को सात पापों से सदा दूर रहना चाहिए (यंग इण्डिया समाचार पत्र, 22 फरवरी 1925) - 1. सिद्धान्त विहीन राजनीति 2. श्रम विहीन सम्पत्ति 3. विवेक विहीन भोगविलास 4. चरित्रविहीन शिक्षा 5. नैतिकता विहीन व्यापार 6.मानवीयता विहीन विज्ञान और 7.त्याग विहीन पूजा। आज आजादी के सत्तर वर्ष बीतने पर भी हम और हमारे माननीय नेता कहलाने वाले महान पुरूषइन सात पापों को जमकर करते हुए निडर है और हिन्दुस्तान में सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक प्रदूषण फैलाने में बड़े अग्रसित है। 

  • हिन्दुस्तान विश्व में प्राकृतिक तौर से निसंदेह बड़ा महान है।जब तक हिमालय और माता पृथ्वी बनी रहेगी, यह देश महान बना रहेगा। हम और हमारे नेतागण महात्मा गांधी के उपरोक्त सिद्धान्त नहीं मानकर क्यों देश की प्राकृतिक महानता को ठेस पहुंचाना चाहते है। 

  • विश्व के दूसरे स्मृद्ध चरित्रवान देशों की तुलना में हिन्दुस्तान की आजादी के सत्तर वर्षों में हमें चौदहसौ से अधिक राजनीतिक पार्टियां बनाने, जनसंख्या विष्फोट करने, अशिक्षित व सुस्त बने रहने, गरीब बन सरकार पर निर्भर रहने, नैतिकता गिराने, जातिवाद व वंशवाद को राजनीति में पनपाने, भ्रष्टाचार फैलाने, संविधानवनियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाने आदि की आजाद देश के सभ्य नागरिक के रूप में हमें सब पाप करने की क्या जरूरत थी ? कहते है कि जैसा राजा वैसी प्रजा । क्या वास्तव में हमारे माननीय नेतागण जिन्होने चतुराई से पारम्परिक राजाओं कास्थानले लिया है, पथभ्रष्ट हो चुके है।क्याजिससे आतंकवाद फैलरहा है? 

  • वर्तमान में तो जम्मू कश्मीर प्रांत की जो आंतकवाद की समस्या ने संकटकालीन रूप लिया है, इसे निपटने के लिए अपना सबका भला बुरा समझते हुए गम्भीर होकर पक्ष-विपक्ष के सम्माननीय नेतागणव कार्यकर्तागणएक दूसरे पर कृपया कीचड़ उछालनातुरंत बन्द करें।अपनी महानता का परिचय दें। होली आ रही है। पाकिस्तान की कमीनी करतूतों को रोकने के साथ ही जो हाल में हमारी बहादुर वायुसेना के नौजवान सैनिकों ने पाकिस्तान में घुसकर आंतकियों के अड्डे व उन्हें मार गिराया है उसकी खुशी में रंग बिरंगे सुगंधित रंगों से विपक्ष अब माननीय प्रधानमंत्री को नकारने के बजाय उनसे होली खेलने की हर्षपूर्वक तैयारी भी करले और कश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाने के लिए धारा370 एवंझएका हटाने के लिए सरकार का पूरा समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री जी का भरपूर साथ।कश्मीर को देश की मुरव्य धारा से जोड़ने के लिए यह देश की जनता की मांग पर अमूल्य कदम जरुरी है। जैसा कि राजस्थान पत्रिका ने भी अपने 27 फरवरी के अंक में यह सुझाव दिया है।अन्दरूनी अपराधी तत्व (पत्थरबाज) को नियन्त्रित करने में भी यह कदम उपयोगी रहेगा।


धन्यवाद ! जय हिन्द! 

सौजन्य से : अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान, चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ राजस्थान, भारत

डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)
पूर्व चीफ इंजीनियर व संस्थान अध्यक्ष
तथा संरक्षक वरिष्ठ नागरिक मंच, चित्तौड़गढ़
+91 9413315843 +91 9413248248  +91 9460490043 (Whats App) 


Monday, 11 February 2019

चित्तौड़ फोर्ट फेस्टिवल - दिनांक 10 से 12 फरवरी 2019

चित्तौड़ फोर्ट फेस्टिवल - दिनांक 10 से 12 फरवरी 2019
(चित्तौड़गढ़ प्रशासन द्वारा संचालित)

हार्दिक अभिनन्दन
चित्तौड़ फोर्ट से राष्ट्र शक्ति एवं भक्ति सिखें अभियान


चित्तौड़ दुर्ग तीर्थराज को लाखों सैलानी हैं आते
दर्शन कर लगा माटी सिर पर ये वीर धन हैं पाते


प्रिय चित्तौड़ मेवाड़वासियों और देश विदेश के सैलानी पर्यटक बन्धुओं वन्देमातरम् !


प्रशासन चित्तौड़ ने फोर्ट फेस्टिवल का है किया पहला प्रयास
इन्हें कोटि कोटि धन्यवाद और हम रखें इसकी प्रतिवर्ष आश


  • यह बड़ा खुशी व हर्ष का विषय है कि चित्तौड़गढ़ प्रशासन ने पहली बार विचार कर तीन दिवसीय ‘‘चित्तौड़गढ़ फोर्ट फेस्टिवल-2019’’ का श्रेष्ठ पर्व ऋतुराज बसन्त पंचमी पर मनाने का बीड़ा उठाया है। इस पवित्र व साहसी कार्य के लिए राजस्थान सरकार के माननीय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत, पर्यटन मंत्री श्री गोविन्द सिंह डोटासरा, पुरातत्व मंत्री श्री गुलाकीदास कल्ला, गृहराज्य मंत्री/जिला प्रभारी मंत्री श्री भगवानलाल जाटव, सहकारिता मंत्री निम्बाहेड़ा से श्री उदयलाल आंजना, चित्तौड़ सांसद श्री सी.पी. जोशी, चित्तौैड़ विधायक श्री चन्द्रभानसिंह आक्या, कपासन विधायक श्री अर्जुनलाल जीनगर, बेगूं विधायक श्री राजेन्द्रसिंह विधुड़ी, बड़ीसादड़ी विधायक श्री ललित ओस्तवाल, जिला प्रमुख श्रीमती लीला जाट व पूर्व विधायक श्री सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत तथा साथ ही विशेषकर स्थानीय चित्तौड़गढ़ जिला प्रशासन की सिरमोर व सर्वमान्य जिला कलक्टर श्रीमति शिवांगी स्वर्णकार, जिलापुलिस अधीक्षक श्री अनिल कयाल व प्रशासन के सभी अधिकारी व कर्मचारी वर्ग का हृदय से पूर्ण सहयोग अत्यन्त प्रशंसनीय है। चित्तौड़गढ़ जनमानस की ओर से हार्दिक आभार व बधाई।
  • विश्व प्रसिद्ध चित्तौड़ फोर्ट 600 फीट ऊँचाई पर 700 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन विंध्याचल पहाड़ पर फैला हुआ केवल फोर्ट नहीं हैं बल्कि हिन्दुस्तान के तीर्थो में महान तीर्थराज चित्तौड़ दुर्ग है। यह किला 7वीं शताब्दी से पारम्परिक संस्कृति, कला, नृत्य व वास्तुकला की परम्पराओं के साथ महान मौर्य व शिशोदिया राजपूत महाराणाओं के इष्टदेव एकलिंगनाथ की कृपा से प्राचीन महान विरासत है। यहां लाखों-करोड़ों देश-विदेश के पर्यटक केवल पर्यटन की दृष्टि से नहीं बल्कि बड़ी श्रद्धापूर्वक दुर्ग दर्शन करने आते है-जिस पर भगवान नीलकंठ महादेव मन्दिर, लाॅर्ड विष्णु  कुम्भ श्याम मन्दिर, शक्ति की देवियां माता श्री कालिका, तुलजा, भवानी, अन्नपूर्णा, व बायण माता मन्दिर, चारभुजा मन्दिर, गणेश मन्दिर, कृष्ण भक्त मीरा मन्दिर, आदिनाथ मन्दिर, 24 जैन तीर्थन्कर (सातबीस देवरी) मन्दिर,राम मन्दिर, विक्ट्री टावर विजयस्तम्भ, टाॅवर आॅफ फेम कीर्तिस्तम्भ, कई राजपूत वास्तुकला में बने सुन्दर महल - महाराणा रतनसिंह महल, महाराणी पद्मिनी महल, महाराणा फतहसिंह महल फतहप्रकाश, वीर जयमल महल, दानवीर भामाशाह हवेली, तोपखाना, नवलखा भण्डार, व्यू पोईन्ट, वीर जयमल राठौड़ व फत्ता चुण्डा की छतरियें, पश्चिम दिशा में किले पर पहुंचने के सात प्रसिद्ध द्वार पाडन पोल से राम पोल, पूर्व में सूरज पोल व दक्षिण में लाखोटा बारी एवं कई सुन्दर जलाशय गौमुख, चतरंग, पद्मिनी, भीमलत, फतह तालाब, सुरजकुंण्ड, अन्नपूर्णा कुण्ड, कुकडेश्वर कुण्ड, रत्नेश्वर, भीमगोड़ी, नीलबाव व बोलिया तालाब आदि तथा दुर्ग पर चारों ओर परिधि पर बनी आश्चर्यजनक 15 किलोमीटर फोर्ट पाल व उतनी की सड़के जो कुल मिलाकर दुर्ग के चारों ओर फैली मनमोहक प्राकृतिक घनी हरियाली के सौन्दर्य से पूरे दुर्ग को श्रेष्ठ चार चांद लगाती दृष्टिगत होती है। दुर्ग की एक प्रसिद्ध कहावत है कि - गौमुख भरे झरना झरे यह निर्भय नाथ की ठौड़, हजारों साल तपस्या करें तब पावे गढ़ चित्तौड़ और सुनिये चित्तौड़गढ़ में राष्ट्र कवि जब्बार से:-



चित्तौड़ दुर्ग की कलाकृति और वैभव है अनमोल - 
शौर्य शिखर पर सूरज चमके बोले शक्ति व भक्ति के बोल।

बोले एकलिंग नाथ किले की काली भव्य भवानी से । 
बोले कृष्ण कन्हैया मीरा प्रेम दीवानी से।  
चन्दन का बलिदान यह बोला पन्ना तेरी कहानी से। 
यह प्रताप का ही प्रताप है जो चित्तौड़ खड़ा मर्दानी से ।। 


जय चित्तौड़  !  जय मेवाड़   !     जय राजस्थान   !   जय भारत   !   
जय विश्व    !   जय पृथ्वी     !     जय गगन, चांद व सूरज  ।

सौजन्य से: अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ राजस्थान, भारत



Monday, 24 September 2018

बाढ़ नियन्त्रण और प्रबन्धन में सक्रिय जनभागिता एक ठोस विकल्प : Dr. B. S. Tanwar



आज चुनौती देष के कई इलाकों को बाढ़ के प्रकोप से बचाने की है । पिछले 70 वर्षो से केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा कई प्रयास किये गये है लेकिन बाढ़ की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है और जलवायु परिवर्तन की वजह से उग्र हुई है ।







बाढ़ नियन्त्रण और प्रबन्धन में सक्रिय जनभागिता एक ठोस विकल्प

(बाढ़ से सड़कें अब बनी नदी नाले और देष में चहुंओर हाहाकार जिसके समाधान हेतु जनसहयोग जन सहभागिता तथा शासन - प्रषासन और आमजन के बीच प्रगाध सम्बन्ध व समन्वय बनाना अनिवार्य)
जहाॅ कहते हैं कि जल बिना नहीं कल वहीं आज अतिवृष्टि से शासन - प्रषासन की काम नहीं कर रही ंहै अकल । पहाड़ों से मैदान तक जमकर बरसे बादल और भारत के कई राज्यों में तेज बहाव से जनता - जनार्दन आमजन भयभीत, पीड़ित और परेषान हुई है । आजादी के सत्तर वर्ष बीत जाने पर केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा अरबों - खरबों रूपये बाढ़ नियन्त्रण व प्रबन्धन पर खर्च करने के पश्चात् भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है । सरकारी तंत्र ने मनमानी ढंग से योजनाएं और परियोजनाएं बिना जन सहभागिता के बनाई और उन्हें क्रियान्वयन किया गया । इनमें न किसी की जिम्मेदारी और न जवाबदेही है । शासक बदलते गये और प्रषासक रिटायर होते गये । खुदा न खास्ता अब भी इनकी अकल आ जाऐं और सर्वे - प्लानिंग से लेकर बाढ़ नियन्त्रण और प्र्रबन्धन में योजना - परियोजना बनाने एवं इन्हें क्रियान्वयन करने व देखरेख करने तक में जनमानस की तन - मन - धन से भागीदारी निष्चित कर सभी प्रकार का सहयोग व योगदान सम्मानपूर्वक बिना किसी भ्रष्टाचार के लिया जाये तो सम्भवतया बाढ़ की समस्या से निजात पाया जा सकता है । सोचें, समझे और करें कि यह जनता में विष्वास पैदा करें कैसे सम्भव होगा । 
पहला कि तुरन्त ईमानदार व योग्य बाढ़ विषेषज्ञों की केन्द्र, राज्य व जिला स्तर पर टास्क फोर्स की टीमें बनाकर स्थानीय प्रबुद्ध जनमानस को शामिल कर यह समीक्षा की जावें कि पिछले 75 वर्षो में प्रत्येक जिले में किस स्तर की बारिष के हालात पर बाढ़ का प्रकोप पैदा हुआ और किस प्रकार की हानि हुई । बाढ़ से निपटने के लिए बाढ़ के दौरान तथा उपरान्त क्या उपाय किये गये । यह वस्तु स्थिति व कारण जानना जरूरी है । 
दूसरा कि जिला व क्षेत्र के स्तर पर प्राकृतिक ड्रेनेज का ढांचा क्या है ? उस ढांचें मंे विकास के नाम से किस प्रकार का अतिक्रमण हुआ है । गांवों के स्तर पर वन व जंगल भूमि तथा चरागाह भूमि पर बेहताषा अतिक्रमण हुआ है । शहरों के स्तर पर पहले तो मास्टर प्लान बाढ़ की परिस्थितियों को देखकर नहीं बनाये गये एवं शहरों व शहरों की परिधि क्षेत्रों में वाटर बाॅडीज का ठीक प्रकार से प्रयोजन नहीं किया गया और जो पहले से पुरानी वाटर बाॅडिज स्थित थी उनका अतिक्रमण कर शहरों का विस्तार कर दिया गया । शहरी क्षेत्रों में जो प्राकृतिक नदी - नालें बह रहे थे उनका भी बुरी तरह अतिक्रमण कर लिया गया और यहाॅ तक कि जो नाले बचे उन पर सीमेन्ट ब्लाॅक डाल कर गृह निर्माण तक कर दिया गया । इस दोषपूर्ण कार्य में भ्रष्ट संबंधित अधिकारियों ने भ्रष्ट स्वार्थी लोगों का पूरा सहयोग किया और यहाॅ तक कि कोर्ट के न्यायायिक आदेषों की भी अवहेलना करते हुए कोई न कोई बहाना बनाकर प्रषासनिक अधिकारियों व उनसे मिलने वाले लोग व सगे संबंधियों ने परवाह नहीं की तो अतिवृष्टि के दौरान अब बेचारी शहरों की सड़कों ने तो नदी - नाले बनना ही था । 
तीसरा कि वन जंगल व कृषि क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की क्या स्थिति बनी है । साथ ही ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में भूमि पर पक्के निर्माण कार्यो से चाहे मकान व सड़क हो इनसे बाढ़ की उग्रता पर क्या और कैसे असर हुआ है । जहाॅ तक पक्के मकानों का सवाल है विषेषकर शहरों में केन्द्र, राज्य व नगरीय सरकार द्वारा कुछ वर्षो से छत वर्षा जल की वाटर हार्वेस्टींग की नीति बनाकर भूजल रिचार्ज का प्लान बना दिषा - निर्देष जारी किये गये हैं । लेकिन यह प्लान कागजों मे सिमट कर रह गया । कई कारणों से यह प्लान लोकप्रिय - जनप्रिय नहीं हो पाया । यह मूलरूप से जनता प्लान था जो सरकारी ब्यूरोक्रेसी में फंस कर उलझ गया । हमारे देष भारत में यह बड़ी विडम्बना है कि आजादी मिलने के उपरान्त लगातार बड़ा लोकतंत्र - प्रजातंत्र का ढोल पिटा जा रहा है लेकिन ग्राउण्ड टूथ यह है कि विधिवत अरबों रूपयों के जो कार्यक्रम बनते है बिना वास्तविक जनसहभागिता के पूर्णरूप से कामयाब नहीं हो पाते है । राजतंत्र में भ्रष्टाचार छिछली राजनीति - सियासत और भयानक अहंकारवाद की वजह से जनता राजतंत्र के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से सामान्यतौर पर दूर रहना पसन्द करती है । ईमानदार योग्य होनहार राजनीतिज्ञों, प्रषासनिक अधिकारियों और समाज सेवकों को आगे बढ़कर पहल कर वर्तमान दोषपूर्ण स्थिति में बड़े सुधार लाना वांछनीय है । 
चैथा कि वर्षाकाल के प्रारम्भ होने और इस बीच मौसम विभाग वर्षा कितनी किस क्षेत्र में और कितने समय होने की सम्भानाओं पर अपन भविष्यवाणी घोषित करती है । इन घोषणाओं के खरी नहीं उतरने पर अक्सर जनता का विष्वास टूट जाता है । लेकिन कभी - कभी अकस्मात् तेज वर्षा हो भी जाती है जिससे बिना एडवांस तैयारी के बाढ़ की स्थिति बनने पर भारी जान-माल के नुकसान का सामना करना पड़ जाता है । 
पांचवा केन्द्र व राज्य सरकार ने बाढ़ नियन्त्रण नीति व अन्य भारी भरकम भूकम्प व सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए विभिन्न स्थानों पर आपदा प्रबन्धन केन्द्र स्थापित किये हैं लेकिन ये केन्द्र प्रभावषाली रूप से कार्य नहीं कर पा रहे है । कारण कि पर्याप्त मात्रा में योग्य स्टाफ एवं बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है । जिससे ये संस्थाएं केवल अकादमिक बन कर रह जाती है । 
छठा कि भयंकर आपदाओं के आने पर कुछ आर्थिक रूप से मजबूत देष मदद के स्वरूप आगे आकर भौतिक व वित्तीय सहायता मानवता बचाने के नाम देते हैं लेकिन ‘‘गुड गवर्मेन्ट’’ की कमी की वजह से ऐसी सहायता का समयबद्ध सही उपयोग नहीं हो पाता है । ऐसे मुष्किल वक्त पर भी जनसहभागिता की आर्गेनाइज्ड रूप में कमी खलती है । 
सतवां कि विभिन्न राज्य और जिला स्तर पर कई छोटे और मध्यम बांध व बड़ी नदियों पर कुछ बड़े बांधों का निर्माण किया गया है । हालांकि सिंचाई उपलब्ध कराना मुख्य उद्देष्य था लेकिन कई जगह पेयजल उपलब्ध कराना भी दूसरा उद्देष्य था । इन बांध संरचनाओं ने अपने कमान क्षेत्र में बाढ़ नियन्त्रण यानि बाढ़ रोकने में भी बड़े सहायक का कार्य किया है । लेकिन इन संरचनाओं की मेन्टेनेंस व उचित देखरेख नहीं होने की वजह से कभी - कभी कुछ हादसे हो जाने से उलटे कमान क्षेत्र में बाढ़ आने की सम्भावनाएं पैदा हो जाती है । बड़े तोर पर बांधों में वर्षा जल एकत्रित किया जाता है वैसे ही निजी स्तर पर जनभागीदारी से पक्के मकानों की छत पर, सेटबैक में हाॅज बनाकर, सड़कों के दोनों ओर स्ट्रोम ड्रेनेज, कृषि खेतों में ड्रीप ट्रेन्चें लगाकर व फार्म पौण्ड, जंगलों में सनकन पौण्ड और पहाड़ों के चारों और पेरिफरल ड्रेन्स बनाकर तथा गाँवों - शहरों में तालाब बनाकर वर्षा जल को रोका जाये तो बाढ़ की समस्या कम हो सकती है । 
बाढ़ के आने से मुख्यतौर से तीन तरह की भारी भरकम जन बाधाएं आती है व नुकसान होते हैं । पहली कि गली - गलियारों, सड़क - रास्ता और रेल - पटरियों पर पानी भर जाने तथा बहाव होने से ट्राफिक जाम हो जाता है । दूसरा कि आबादी क्षेत्र में निचले हिस्से के घरों पर पानी भर जाता है एवं कभी - कभी पूरा गांव - मोहल्ला पानी मे डूब जाता है । तीसरा कृषि फसलें पानी में डूबने से विस्तृत तौर से नुकसान होता है । पानी मे डूबकर कई लोगों के मरने की घटनाएं भी होती है । करोड़ों रूपयों के धन सम्पत्ति की आर्थिक हानि होती है । इसके अलावा अधिक समय तक बाढ़ के पानी के रूके रहने पर बीमारियाॅ फैल जाती है जो स्वास्थ्य के लिहाज से कभी - कभी महामारी का रूप भी ले लेती है । 
सरकार के सार्वजनिक उपायों में जनभागीदारी निभाने के अलावा जनमानस अपने निजी स्तर पर बाढ़ के नियन्त्रण व प्रबन्धन मे सहभागिता स्थानीय परिस्थिति के अनुसार अपनी इच्छाषक्ति द्वारा कर सकता है जो बाढ़ राहत में बड़ी उपयोगी सिद्ध हो सकती है । अन्त में दबाव देकर सुझाव है कि शहरों में विषेषकर जनमानस द्वारा पक्के घरों की छतों पर वर्षा जल को छोटे टैंक के रूप में आसानी से एकत्रित करके और भूतल पर उपलब्ध भूमि पर हौज यानि भूमिगत टैंक बनाकर वर्षा जल इकट्ठा तो किया ही जा सकता है । यह पानी नहाने - धोने, लेट्रीन, फर्ष व वाहन साफ करने, घर के बाहर - अंदर पेड़ों की सिंचाई बर्तन साफ करने व किचन गार्डन में उपयोग में लाया जा सकता है । इस विधि पर भी फोकस किया जाये कि गांवों में किसानों द्वारा अपने खेतों पर फार्म पौण्ड व विभिन्न पैटर्न पर उचित गहराई की वर्टीकल खाईयाॅ खोदकर वर्षाजल रोकने से मोयल मोइष्चर को बढ़ावा दिया जा सकता हे । पहाड़ी क्षेत्र में जो वर्षा जल तेजी से पहाड़ के ढलान से नीचे उतरता है उसे पहाड़ के चारों ओर धरातल पर पेरिफेरल खाईयां खोदकर रोका जा सकता है । 
इन अतिरिक्त जन उपायों को जनभागीदारी द्वारा आसानी से अमलीजामा पहनाया जा सकता है, शर्त कि जनता जनसमूह या सेल्फ हेल्प गु्रप बनाकर इनके द्वारा आपसी जनसहभागिता से जनभागीदारी निभाते हुए योजनाबद्ध कार्य किया जाये । इन्हीं सब चर्चित उपायों से बाढ़ के तीव्र आवेग को कम किया जा सकता है और परिणामस्वरूप बाढ़ से पीड़ित जनमानस को काफी राहत मिल सकती है चाहे वह शहरी या ग्रामीण इलाका रहा हो । 
अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

 
डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)
पूर्व चीफ इंजीनियर व संस्थान अध्यक्ष
तथा संरक्षक वरिष्ठ नागरिक मंच, चित्तौड़गढ़
+91 9413315843 +91 9413248248  +91 9460490043 (Whats App)
शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वच्छता रख मानवीय मर्यादा और भाईचारा बढ़ाएंे।


- विष्लेषक प्रसिद्ध जल विषेषज्ञ है । लम्बे समय से राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधन विकास क्षेत्र से सम्बन्ध रहे है । 





Sunday, 15 April 2018

जनसंख्या नियंत्रण अभियान

सामाजिक अभियान-4

जनसंख्या विस्फोट ने आम आदमी की जिंदगी कष्टदायक बना दी जो भ्रष्टाचार का कारण भी बनी हैं।

(जनसंख्या नियंत्रण अभियान)

"भारत की जनसंख्या क्या बढ़ी बेदर्दी जिंदगी इंसान की हो गई
रो-रो कर आराम को तरसे करोड़ों की शांति नींद में खो गई"

बढी जनसंख्या ने अपराधियों के तोड़ दिए सारे रिकार्ड,
धर्म व जाति के ठेकेदारों के सियासत में चल गए भयानक कार्ड

"जनसंख्या नियंत्रण कानून लाओ, भारत के लोगो की जिन्दगी बचाओं।"


भारत महान के प्रिय बंधुओं व राष्ट्र भक्तों, हार्दिक अभिनंदन ।

  • आप हम सभी क्या बड़ी परेशानी में यह महसूस नहीं कर रहे हैं कि जनसंख्या की अत्यधिक बढ़त ने अपने देश का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ने के साथ ही गांवों और शहरों का वातावरण बड़ा गंदा बना दिया है। नई पीढ़ी ने बेरोजगारी, महंगाई तथा शारीरिक पीड़ा के साथ ही मानसिक बेचैनी की वजह से देश की श्रेष्ठ संस्कृति, नैतिकता व आम शिष्टाचार के स्तर को तलाक देने के लिए मजबूर हो गई है।

  • अतः सबसे पहली प्राथमिकता हमारी जनसंख्या नियंत्रण की बन गई है। जाति और धर्म के ठेकेदारों ने देश की आजादी के पश्चात हमारे लचीले लोकतंत्र व संविधान में आजादी के मूल अधिकारों का गलत फायदा उठाते हुए "जनसंख्या विस्फोट" की भयानक स्थिति को पैदा करने में "आग में तेल डालने" का काम किया है। जिससे हम 35 करोड़ से 134 करोड़ चार गुना हो गए है। दुनिया के विकसित देशों की स्थिति हमारे से बिल्कुल विपरीत है। अमेरिका का क्षेत्र भारत के क्षेत्र का दोगुने से भी अधिक है, लेकिन आबादी एक-चौथाई( 25 प्रतिशत) है। यूरोप के देशों की आबादी का अनुपात काफी कम है, क्योंकि वह आबादी बढ़ाने में बिल्कुल विश्वास नहीं करते है। चीन की आबादी बेशुमार थी। उसे काबू कर आज चीन विश्व में अपना पहला स्थान बनाने के लिए तत्पर है।अब विश्व में सभी विकसित देशो में जीरो आबादी बढ़त का सिद्धांत''अपनाया जा रहा है। 
  • हम अब क्या करें: हम किसी भी जाति व धर्म के हो पर दिल से “हम दो-हमारे दो' का सिद्धांत तुरन्त अपनाते हुए हर क्षेत्र में जिम्मेदारीपूर्वक बड़ी मेहनत से ड्यूटी निभाऐ। भ्रष्टाचार पर भी नियंत्रण करें। 
  • जनप्रतिनिधि क्या करे: दुषित राजनीति का खेल खेलना बंद करे। संसद, विधानसभा व ग्राम पंचायतों को राजनीति का अखाड़ा बनाने की कोशिश ना करें। लोकतंत्र को सुधारने का प्रयास करे। 
  • सरकार क्या करें: जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाऐ और कठोरता से लागू करे।राजनीतिक पार्टियां चुनाव आयोग में 1400 से भी अधिक रजिस्टर्ड है। कानून बना केवल दो या तीन पार्टियां ही अस्तित्व में रखी जाऐ। जैसाकि दूसरे विकसित लोकतांत्रिक देशों में है। प्रत्येक जाति और वर्ग को राष्ट्र और सर्वसमाज के हित में अपने सम्मानीय रूढीवादी पर्सनल विचारधाराओ में आवश्यक नया बदलाव लाना चाहिए।

धर्म का न करो झूठा प्रचार व दिखावा, धर्म व जाति के आड़ में जनसंख्या मत बढ़ाओ

जीना है अच्छे इंसान की जिंदगी तो, भाईचारा बनाओ और लोकतंत्र का मजाक मत उडाओ

धर्म-कर्म चाहे जो हो अब जनसंख्या की बढ़ते पर रोक लगा, इंसानियत की जिंदगी जीनी होगी

ना कटे पेड़ना पानी का हो दुरुपयोग रख जमीन उपजाऊ, प्रकृति के पर्यावरण की सुरक्षा करनी होगी


आबादी बढ़ी है बढाओ न इसे
  खालिस दिल में है तो निकालो इसे।
 वतन सबका है बचालो इसे।



Monday, 12 March 2018

Jouhar : Ek Amar Ghatha



विषय : जोहर एक अमर गाथा : डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)

Friday, 9 March 2018

Jal or hamara kal : Dr. Bhagwat Singh Tanwar

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 विषय : जल और हमारा कल , डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर) 
 Subject: Water and our Future: Dr. Bhagvat Singh Tanwar (Tom

Tuesday, 6 March 2018

Penshnar Samaj or samaj ke prti kartvya : Dr. Bhagvat Singh Tanwar (Tomar)




विषय : पेंशनर समाज और समाज के प्रति उनका कर्तव्य : डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)

Subject: His duty towards the pensioner society and society: Dr. Bhagvat Singh Tanwar (Tomar)

Monday, 5 March 2018

Pradhan Mantri Narendra Modi : Dr. Bhagwat Singh Tanwar




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'राजनीतिज्ञ कम, राष्ट्र सुधारक ज्यादा
Prime Minister Narendra Modi 'not politician , but nation reformer more : Dr. Bhagwat Singh Tanwar

Sunday, 4 March 2018

GST ke Achhe or Bure Prabhav : Dr. Bhagwat Singh Tanwar



GST के अच्छे और बुरे प्रभाव: डॉ. भगवत सिंह तंवर 

Good and bad effects of GST : Dr. Bhagwat Singh Tanwar

Thursday, 1 March 2018

Holi ki Shubh Kamnayen

होली की हार्धिक शुभ कामनाएं !

Wednesday, 28 February 2018

Pradhan Mantri Narendra Modi 'Rajnitigya Kam Rashtra Sudharak Jyada : Dr. Bhagwat Singh Tanwar



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'राजनीतिज्ञ कम, राष्ट्र सुधारक ज्यादा
Prime Minister Narendra Modi 'not politician, but nation reformer more

Dr. Bhagwat Singh Tanwar

Sunday, 25 February 2018

Penshnar Samaj or samaj ke prti kartvya : Dr. Bhagvat Singh Tanwar (Tomar)




विषय : पेंशनर समाज और समाज के प्रति उनका कर्तव्य : डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)
Subject: His duty towards the pensioner society and society:
Dr. Bhagwat Singh Tanwar

Sunday, 18 February 2018

Mahatma ghandhi ke sapno ka bharat kya hona tha or kya ho gya




 महात्मा ग़ांधी के सपनो का भारत क्या होना था और क्या हो गया ।
 Mahatma Gandhi's dream was to be like India and what has happened.

Dr. Bhagwat Singh Tanwar

Thursday, 15 February 2018

Geeta ka Gyan Vyaktitv Vikas ke liye : Dr . Bhagwat Singh Tanwar

Mahatma ghandhi ke sapno ka bharat kya hona tha or kya ho gya :Dr.Bhagwat Singh Tanwar



महात्मा ग़ांधी के सपनो का भारत क्या होना था और क्या हो गया ।

Mahatma Gandhi's dream was to be like India and what has happened.

Dr. Bhagwat Singh Tanwar

Monday, 14 August 2017

जीएसटी अपनाओ अभियान

हिन्दुस्तान में चल रही आर्थिक, सांसस्कृतिक व शिक्षा की क्रांति के सहर्ष भागीदार बनिये।
स्वतंत्रता दिवस पर विशेष जनजागरूकता अभियान नं. 9,10,11

जीएसटी अपनाओ अभियान
ईमानदारी से टेक्स पूरा चुकाओ- देश की आर्थिक शक्ति बढ़ाओ

(GST : Goods & Servies Tax यानि  Good Simple Tax-PM)

देश में अब बदलाव की ताकत को जानो - जीएसटी के ताकतवर लक्ष्य को पहचानो

मेवाड़ ने सिखाई है भाषा सदा गौरव, त्याग और स्वाभिमान की
जीएसटी का कर विरोध, बोलो नही बोली मेवाड़ के अपमान की

प्रिय मेवाड़ वासियोें, 
               वन्दे मातरम्!

  • हिन्दुस्तान की वर्ष 1947 में आजादी मिलते ही परम आदरणीय बहादुर मेवाड़ महाराणा भूपालसिंह जी ने दूर दृष्टि से बिना विरोध के सर्वप्रथम मेवाड़ राज्य का विलय इस आजाद देश में कर दिया। बड़े गौरव और  मान- सम्मान  के साथ सम्पूर्ण राजस्थान के ‘‘ महाराज प्रमुख ’’ बने जिससे मेवाड़ के महान इतिहास स्वरूप आज भी  मेवाड़ का नाम देश और विदेशो में बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है, जबकि अन्य विरोधी राजा-महाराजाओं को देश व जनता ने भूला दिया।
  • जीएसटी हिन्दुस्तान को नई आर्थिक ताकत देने वाली पुरानी 160 देशों द्वारा चलाई व अजमाई हुई श्रेष्ठ टेक्स प्रणाली है। फ्रांस जैसे शक्ति शाली राष्ट्र ने जीएसटी को वर्ष 1954 में 60 वर्ष पहले ही अपना लिया था।
  • हिन्दुस्तान में जीएसटी अपनाने का मतलब है कि इस महान अध्यात्मिक राष्ट्र को ‘‘लंगोट-बनियान’’ पहनावे की सभ्यता से एवं गरीबी में 70 वर्षो से ‘‘पली बढ़ी जनता’’ को विश्व के ताकतवर देशों के मुकाबले एक आधुनिक गौरवशाली सभ्य ताकतवर देश बनाना है। यह महान संकल्प वर्तमान ‘‘ शासन प्रशासन’’ का है जिसे बड़े सोच विचार कर माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा एक बड़ा साहसिक कदम 1 जुलाई 2017 को उठाया गया है। विरोध नहीं बल्कि देश में इस नई टैक्स प्रणाली को कामयाब बनाने सकारात्मक रूप से प्रयास होने चहिए।
  • हिन्दुस्तान में जीएसटी अपनाने का मतलब है कि इस महान अध्यात्मिक राष्ट्र को ‘‘लंगोट-बनियान’’ पहनावे की सभ्यता से एवं गरीबी में 70 वर्षो से ‘‘पली बढ़ी जनता’’ को विश्व के ताकतवर देशों के मुकाबले एक आधुनिक गौरवशाली सभ्य ताकतवर देश बनाना है। यह महान संकल्प वर्तमान ‘‘ शासन प्रशासन’’ का है जिसे बड़े सोच विचार कर माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा एक बड़ा साहसिक कदम 1 जुलाई 2017 को उठाया गया है। विरोध नहीं बल्कि देश में इस नई टैक्स प्रणाली को कामयाब बनाने सकारात्मक रूप से प्रयास होने चहिए।
  • हिन्दुस्तान में जीएसटी अपनाने का मतलब है कि इस महान अध्यात्मिक राष्ट्र को ‘‘लंगोट-बनियान’’ पहनावे की सभ्यता से एवं गरीबी में 70 वर्षो से ‘‘पली बढ़ी जनता’’ को विश्व के ताकतवर देशों के मुकाबले एक आधुनिक गौरवशाली सभ्य ताकतवर देश बनाना है। यह महान संकल्प वर्तमान ‘‘ शासन प्रशासन’’ का है जिसे बड़े सोच विचार कर माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा एक बड़ा साहसिक कदम 1 जुलाई 2017 को उठाया गया है। विरोध नहीं बल्कि देश में इस नई टैक्स प्रणाली को कामयाब बनाने सकारात्मक रूप से प्रयास होने चहिए।
  • हिन्दुस्तान में जीएसटी अपनाने का मतलब है कि इस महान अध्यात्मिक राष्ट्र को ‘‘लंगोट-बनियान’’ पहनावे की सभ्यता से एवं गरीबी में 70 वर्षो से ‘‘पली बढ़ी जनता’’ को विश्व के ताकतवर देशों के मुकाबले एक आधुनिक गौरवशाली सभ्य ताकतवर देश बनाना है। यह महान संकल्प वर्तमान ‘‘ शासन प्रशासन’’ का है जिसे बड़े सोच विचार कर माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा एक बड़ा साहसिक कदम 1 जुलाई 2017 को उठाया गया है। विरोध नहीं बल्कि देश में इस नई टैक्स प्रणाली को कामयाब बनाने सकारात्मक रूप से प्रयास होने चहिए।
  • हिन्दुस्तान में जीएसटी अपनाने का मतलब है कि इस महान अध्यात्मिक राष्ट्र को ‘‘लंगोट-बनियान’’ पहनावे की सभ्यता से एवं गरीबी में 70 वर्षो से ‘‘पली बढ़ी जनता’’ को विश्व के ताकतवर देशों के मुकाबले एक आधुनिक गौरवशाली सभ्य ताकतवर देश बनाना है। यह महान संकल्प वर्तमान ‘‘ शासन प्रशासन’’ का है जिसे बड़े सोच विचार कर माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा एक बड़ा साहसिक कदम 1 जुलाई 2017 को उठाया गया है। विरोध नहीं बल्कि देश में इस नई टैक्स प्रणाली को कामयाब बनाने सकारात्मक रूप से प्रयास होने चहिए।


अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

 
डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)
पूर्व चीफ इंजीनियर व संस्थान अध्यक्ष
तथा संरक्षक वरिष्ठ नागरिक मंच, चित्तौड़गढ़
+91 9413315843 +91 9413248248  +91 9460490043 (Whats App)
शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वच्छता रख मानवीय मर्यादा और भाईचारा बढ़ाएंे।



श्रीमती देवेन्द्रा कंवर

समाज उत्थान कार्यकर्ता
01472 . 297025




चीन की दखलबाजी हटाओ अभियान

सैंकड़ों साल की गुलामी से बाहर निकलकर हिन्दुस्तान की आजादी और संस्कृति की रक्षा करना कत्र्तव्य है।
स्वतंत्रता दिवस पर विशेष जनजागरूकता अभियान नं. 9,10,11
चीन की दखलबाजी हटाओ अभियान
कई सालों से बढ़ा व्यापार चीन का, हमने उसे ताकतवर बनाया
बन वह दोस्त पाकिस्तान का, हमारी सीमाओं पर फिर चढ़ आया
आक्रामक चीन को दबाना है तो मोदी जी के हाथ मजबूत करे-विपक्ष कृपया सूने कि साहसी प्रधानमंत्री का अपमान करना बंद करे
पड़ोसियों के आंतकवाद और हमलों से आजादी बचाओ
प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दांे पर पक्ष और विपक्ष एक हो जाओ

प्रिय चित्तौड़ बंधुओं,
                          वन्दे मातरम् !

        आज 133 करोड़ आबादी का मजबूत राष्ट्र हिन्दुस्तान पक्ष-विपक्ष के लगातार गलत तानों-बानों और छिछले झगड़ो से विश्व में चीन की उभरती ताकत और पाकिस्तान के हमारे देश में फैलाये आतंकवाद से मुकाबला करने में कमजोर होने सा प्रतीत हो रहा है। क्या विपक्ष का यही काम रह गया है कि हर बात पर आंखे मींच कर सरकार की बुराई करें और बहुमत में रही भेली भाली गरीब और अशिक्षित जनता-जर्नादन को भ्रमिक कफिर से पाने की लालसा में पांच वर्ष पूरे कर दें। देश के मान्यता प्राप्त कर्णधारों कृपया थोड़ी शर्म करो। अपने स्वार्थ और पार्टी लाईन से उपर उठे तथा राष्ट्र की भलाई सोच कर अपने अच्छे-बूरे कर्म और इतिहास को भूलकर वर्तमान की कठिन परिस्थितियों में गुजरते हुए देश की रक्षा और जनता के रोजगार एवं भूख के दर्द को कम करने के लिए नकारात्मक सोच को छोड़कर सकारात्मक सोच रख कर पूर्ण ठोस सुधार लाने का प्रयास करंे। राष्ट्र की अच्छाई के लिए थोड़ा बहुत विरोध भी समय की आवश्यकता के अनुसार धैर्य पूर्वक व शिष्टाचार तरीके से होना चाहिए जिसे पावर के नशे में रहते हुए विभिन्न सरकारें उचित विरोध को सहर्ष स्वीकार करें तथा विपक्ष का एहसानबद्ध भी रहे।  किसी बात का गलत मतलब नहीं निकाला जायें। इससे ज्यादा स्वतंत्रता की वर्षगांठ पर क्या लिखा जाए । 

 धन्यवाद! जय हिन्द! 
                            भारत माता की जय जयकार!


अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

 
डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)
पूर्व चीफ इंजीनियर व संस्थान अध्यक्ष
तथा संरक्षक वरिष्ठ नागरिक मंच, चित्तौड़गढ़
+91 9413315843 +91 9413248248  +91 9460490043 (Whats App)
शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वच्छता रख मानवीय मर्यादा और भाईचारा बढ़ाएंे।



श्रीमती देवेन्द्रा कंवर

समाज उत्थान कार्यकर्ता
01472 . 297025





नाम छोड़ो- जनता से दिल जोड़ो अभियान

नाम छोड़ो- जनता से दिल जोड़ो अभियान

विकास की शिलान्यास व उद्घाटन पट्टियों पर आये दिन आपसी नाम का झगड़ा छोड़े
विकास कार्यो का नाम भी पक्ष-विपक्ष के नेताओं का रख जनता का दिल नहीं तोड़े।

भौगोलिक प्रकृति से जुड़े नाम किसी विकास निर्माण कार्य के रहते हैं सदा अमर, ऐसी सोच वाले लिडर स्थाईतौर से पहुंचते है शिखर

विचार से कर्म, कर्म से आदत,आदत से चरित्र
और चरित्र से भविष्य का निर्माण होता है विचित्र
प्रिय चित्तौड़ बंधुओं,

                    वन्दे मातरम् !

                प्रकृति से जुड़कर जीवन जीने से ऊँचा कोई जीवन सुखदायक नहीं हो सकता। देखते है कि आज कर्मचारी से लेकर  अधिकारी, उद्यमी, व्यापारी, अन्नदाता किसान, मजदूर और माननीय नेताओं से लेकर आदरणीय मंत्रीगण व प्रधनमंत्री तथा महामहीम राज्यपाल व राष्ट्रपति अपने अपने निर्धारित समय तक जनसेवा व लोकसेवा में रहकर अपना पवित्र कत्र्तव्य निभाते आये है तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने तो अपने आप को देश का चैकीदार बन संबोधित किया है।  प्रत्येक माननीय व्यक्ति आदर्श देश सेवा कर के नियमानसुार सेवानिवृत हो जाते हैं। पक्ष विपक्ष के प्रतिष्ठित जन कार्यकत्र्ता व पदाधिकारीगण किसी विकास कार्य से संबंधित विकास पट्टियों पर अपने माननीय नेताओं के नामकरण पर झगड़ पड़ते है और यहां तक कि कोर्ट में पहँुचकर न्यायिक लड़ाई भी लड़ी जाती है। यह केवल निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए होता है जो सिद्धान्त से अच्छी बात नहीं है। राष्ट्रहित में प्राकृतिक भौगोलिक नाम या आजादी से स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़े प्रसिद्ध हुए महान त्यागी व बलिदानी देश के सपूतों का नाम ही लोक विकास कार्यों का उनकी यादगार में रखना उचित है। इसी संबंध में कोई गलत न समझे और कोई बुरा न माने तो उपरोक्त विचारधारा के अनुसवार एक व्यवहारी सुझाव है कि चित्तौड़ शहर में आदित्य सीमेंट द्वारा नये सौन्दर्यवान बनाये आडिटोरियम का नाम  ‘‘बैड़च’’या ‘‘हल्दीघाटी ’’ या ‘‘ महाराणा प्रताप ’’या ‘‘मीरा’’ आडिटोरियम रखा जावें।  
धन्यवाद!  
              जय हिन्द! 
                         भारत माता की जय जयकार
अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

 
डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)
पूर्व चीफ इंजीनियर व संस्थान अध्यक्ष
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श्रीमती देवेन्द्रा कंवर

समाज उत्थान कार्यकर्ता
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Monday, 5 June 2017

विश्व पर्यावरण दिवस : 5 जून 2017

वायु, जल, ऊर्जा, पृथ्वी, आकाश पंच तत्व को शुद्ध रहने दो।
प्रदुषण रोको पर्यावरण बचाओ स्वस्थ्य पर्यावरण में जीवों व जीने दो।।

बच्चा बालक युवा जवान रखो प्रकृति पर्यावरण का पूरा ध्यान और रहो बन अच्छे इंसान।
कार्बन उत्सर्जन - चीन 27.3% ,अमेरिका 16.4%, भारत 6.6%
195 देशो का पेरिस जलवायु समझौते का पालन हो।

प्रिय भाई- बहनो,
                         जय हिन्द!
        आज 5 जून को पूरा विश्व पर्यावरण दिवस मना रहा है, क्योकिं विकास की अंधी दौड़ सम्पूर्ण विश्व के पर्यावरण के लिये खतरा बन चुकी है। वायु दूषित, जल जहरीला, उर्जा प्रदूषित, आकाश में छिद्र और पृथ्वी प्राणी की बढ़ती जनसंख्या से कम्पयमान हो रही है। पुण्य कम हो रहे है और पाप-अपराध बढ़ रहे है। मानव मानव से अपमानित हो रहा है। न्यायालयों में मुकदमों का ढे़र लगा पड़ा है।  सम्पर्क पोर्टल भी शिकयतों से लदा पड़ा है और बेअसर हो चुका है। क्या इसी को जीवन जीना कहते है घ् नहीं! तो पिछे मुड़िये और ‘‘स्वच्छ भारत अभियान’’ को सर्वोच्च महत्व देते हुए गांव-शहर की स्वच्छता के साथ-साथ प्राकृतिक पर्यावरण के पंच तत्व वायु, जल, ऊर्जा, पृथ्वी और आकाश को शुद्ध बनाये रखने में पूर्ण सहयोग करते हुए अच्छे संस्कार, शिष्टाचार और नैतिकता का परिचय देते हुए निम्न प्रमुख पर्यावरण पहलुओं पर भी ध्यान देते हुए मानव जीवन को विश्व पटल पर आनंदमय बनाईये।
1. पारिवारिक पर्यावरण  2. शिक्षा-सांस्कृतिक व धार्मिक पर्यावरण  3. सामाजिक पर्यावरण
4. आर्थिक पर्यावरण और 5. राजनीतिक पर्यावरण
  अगर यह सब पर्यावरण के पहलू शुद्ध रहेगें  तब प्राकृतिक पर्यावरण  अपने आप ही शुद्ध बना रहेगा।  प्रकृति का शोषण अपराध है।
भारतीय पांच हजार साल पुराना अथर्ववेद प्रकृति को समर्पित है।  इससे प्रेरणा लें और प्रकृति को समर्पित रहकर तन्दुरूस्त रहें।
 प्राकृतिक पर्यावरणः- वायु, जल, अग्नि, ऊर्जा, पृथ्वी एवं आकाश पंचतत्व ये जीवनदान है। शरीर पंच तत्वों से बना है। जनसंख्या विस्फोट पर नियत्रंण रखते हुए  ‘‘शुद्ध वायु के लिए’’ अधिक से अधिक पेड़ लगाये। गांव -शहरों में पेट्रोलियम वाहनों का व्यर्थ उपयोग कम करें । स्थानीय जगह साईकिल का प्रयोग करें। गंदगी नहीं फैलने दें। ‘‘शुद्ध जल के लिए’’ नदी, नालों तालाब, झील, कुओं-बावड़ियो, बोरवेल और समुद्र में कचरा मत जाने दीजिये। जल का उपयोग आवश्यकता अनुसार सही तरीके से करें। ‘‘शुद्ध अग्नि- ऊर्जा के लिए’’ पवन, सौलर व भौतिक ऊर्जा का अधिक प्रयोग हो तथा पृथ्वी का तापमान नियत्रंण में रखते हुए ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन से बचें।     ‘‘शुद्ध आकाश के लिए’’ आकाश के  प्रदूषण को बचाना होगा ताकि ओजोन परत में छेद नहीं हों।  पेराबेंगनी सूर्य की किरणों से ओजोन परत हमारा बचाव करती है।  ‘‘शुद्ध पृथ्वी के लिए’’  पृथ्वी पर अत्यधिक अवैध खनन को रोका जायें। पेट्रोलियम व भूजल को सीमित मात्रा में निकाला जायें।  पाॅलीथीन का दुरूपयोग नही हो।  मिटटी में अत्यधिक रसायन नहीं मिलाये जावें। पृथ्वी का ‘‘आईसोस्टेटिक बेलेंस’’ बना कर रखा जायें।  इन्हीं  सब बातों का ध्यान रखने के लिए ‘‘विश्व पर्यावरण दिवस’’  के अलावा विश्व जल दिवस, विश्व ओजोन दिवस, विश्व उर्जा दिवस और विश्व पृथ्वी दिवस भी मनाये जाते हैं तथा संबधित कई अधिनियम नियम बनाये गये है। इनका पालन करना प्रत्येक देश  व विश्व के नागरिक का कत्र्तव्य है। धन्यवाद।
।।
निजी छोड़ पब्लिक वाहन का हो खुशी से अधिक उपयोग। उर्जा बचा सड़क पर्यावरण बचाने में जन-जन का हो सहयोग।।
अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

 
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तथा संरक्षक वरिष्ठ नागरिक मंच, चित्तौड़गढ़
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श्रीमती देवेन्द्रा कंवर

समाज उत्थान कार्यकर्ता
01472 . 297025





Saturday, 27 May 2017

वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप जयंती (2017)


सामाजिक बुराईयें दूर हटाओ अभियान


माई ऐहड़ो पूत जण, जेहड़ो राणा प्रताप।
अकबर सूतो उछके, जाण सिराणे सांप।।


वीर प्रताप जैसे हो आदर्श विचार,कर्म, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की हो गहरी भावना।
हे प्रभु! दो शक्ति, धैर्य, मर्यादा, साहस और त्याग प्रताप सा, करु सदा यही साधना।।

गौरव स्वाभिमान सम्मान साहस और त्याग की भावना से स्वतंत्रता की रक्षा करना प्रत्येक वीर हिन्दुस्तानी का फर्ज है।

आदरणीय चित्तौड़ के वर्तमान वीर और वीरांगनाओं व देशवासियो,

                                               श्री प्रताप जयंती पर हार्दिक अभिनदंन !


राष्ट्र प्रेम सम्मान और रक्षा हेतु मर मिटना ही सबसे बड़ा धर्म,कत्र्तव्य तथा गौरव, त्याग एवं बलिदान कहलाता है। आजादी के बाद 70 वर्षो में हमारा यह महान राष्ट्र हिन्दुस्तान हमारी अज्ञानता व कुछ गलतियों एवं मुठ्ठीभर लोगों के कुकर्मो से कई बुराईयों का शिकार हो गया है, जबकि पड़ोसी देश चीन कई मामलों में आगे बढ़कर हमें आँखे दिखाने का दुस्साहस कर रहा है। आज वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप जयंती के सर्वोत्तम पवित्र अवसर पर इनके बतायें मार्ग, इच्छानुसार व आर्शीवाद से संकल्प ले कि निम्न प्रमुख बुराईयों से देश को मुक्ति  कर शक्तिशाली बनायें।




1. भ्रष्टाचार:- यह विकास के प्रत्येक क्षेत्र में घोर बाधा बनकर खड़ा है। इसे मिटायें।
2. आतंकवाद:- यह बाहर से देश को तोड़ने की चुनौती दे रहा है। इसे मिटाने में प्रत्येक देशवासी सहयोग करें।
3. नक्सलवाद:- यह अंदर से देश को तोड़ने की चुनौती दे रहा है। इसे मिटाने में प्रत्येक देशवासी सहयोग करें।
4. धार्मिक दंगे:- कुछ धर्म के ठेकेदारों तथा असामाजिक व गलत राजनीतिक तत्व के बहकावे में नही आवें।
5. सामाजिक दंगे:- जाति भेदभाव करने वाले दंगेकत्र्ताओं के बहकावें में नहीं आवें।
6. राजनीतिक दंगे:- गलत राजनीतिक विरोधाभास पनपाने वाले दंगेकत्र्ताओं के बहकावें में नहीं आवें।
7. अवांछनीय धरने रैलिया:- ये देश के विकास में बाधक है। इनसे बचें- बचावें।
8. राष्ट्रीय सम्पत्ति की तोड़फोड़:- धरने व दंगे फसाद के दोरान उग्र होकर राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुकसान नहीं पहुचावें।
9. नारी उत्पीड़न:- नारी समाज का अपमान सबसे बड़ी मूर्खता है। सच्चे इसंान बनकर रहें।
10. बाल विवाह:- यह प्रकृति तथा पवित्र मानवता के खिलाफ निंदनीय कृत्य है। ऐसा नहीं करें।
11. तलाक:- तलाक या तीन तलाक देना अमानवीय व्यवहार कहलाता है। स्नेह प्रेम से जीवन जीयें।
12. बलात्कार:- मानव के लिए इससे बड़ा कोई अपराध नहीं है। जेल नहीं अपराधी को फांसी दी जायें।
13. अशिक्षा व अज्ञानता:- देश के प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त शिक्षित व ज्ञानी होना जरूरी है।
14. गरीबी:- शिक्षा, ज्ञान व कठोर परिश्रम के सहारे गरीबी मिटाकर जीवन सफल बनावें।
15. व्यक्ति गत दोष:- आलस्य,क्रोध, नशा, बुरा व्यवहार, गाली- गलोच, झगड़ा- फसाद, मारपीट, परस्पर ईष्र्या, दुश्मनी बेईमानी, फर्जीवाड़ा, मिलावट, सट्टेबाजी, कालाधन, चालबाजी, धोखाधड़ी, झूठ, चोरी-सीनाजोरी, चिटींग, लूटमार आदि बुराईयों  का त्याग करें। अच्छें इंसान तथा देश के अच्छे नागरिक बनकर मानव, वरिष्ठ जन व देश सेवा में आगे आकर धरती माता को स्वर्ग बनावें।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हिन्दुस्तान को विश्व में महान शक्ति शाली राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है।   पूरे तन-मन से सहयोग करें।
                                                          भारत माता की जय !

अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान चित्तौड़ीखेड़ा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

 
डाॅ. भगवत सिंह तंवर (तोमर)
पूर्व चीफ इंजीनियर व संस्थान अध्यक्ष
तथा संरक्षक वरिष्ठ नागरिक मंच, चित्तौड़गढ़
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श्रीमती देवेन्द्रा कंवर

समाज उत्थान कार्यकर्ता
01472 . 297025