Saturday, 18 June 2016

राजा रामशाह तोमर (तँवर) की पुण्य तिथि और 21 जून 2016 विश्व दिवस

जन जागरूकता शत् शत् वन्दन! 18 जून 2016 शत् शत् प्रणाम ! अभियान सं. 5, वर्ष 2016

हल्दीघाटी युद्ध का परमवीर महान योद्धा ग्वालियर राजा रामशाह तोमर (तँवर) की पुण्य तिथि को हार्दिक श्रद्धान्जली

  • ग्वालियर से चित्तौड़गढ़ पधारकर मेवाड़ महाराणा उदयसिंह के साथ दिल्ली की सल्तनत को ललकारा एवं जीवनभर मेवाड़ का पूरा साथ दिया। 
  • महाराणा उदयसिंह ने ‘‘शाह की उपाधि" देकर सम्मान किया व मेवाड़ की राजकुमारी का विवाह सबसे बड़े राजकुमार कुँ. शालीवान के साथ किया। 
  • राजा रामशाह ने जालमसिंह को हटवा महाराणा प्रताप को मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठाया, जो बड़ा महान योगदान साबित हुआ है। 
  • हल्दी घाटी के 18 जून 1576 के रक्तकाल के युद्ध में राजा रामशाह के मय इनके तीन सुपुत्र कुँ. शालीवान, कुँ. भवानीसिंह, कुँ. प्रतापसिंह व पौत्र बलभद्र एवं चम्बल घाटी के 350 राजपूत वीर शहीद हुए। 
  • मेवाड़ महाराणा कर्णसिंह ने सन् 1624 में रक्त तलाई में इन महान शहीद बलिदानी राजा रामशाह व राजकुमारों के शिलालेख लगवा छतरियाँ बनवाई। 
! सभी महान बलिदानी शहीदों को श्रद्धासुमन !

अभियान सं. 6 वर्ष 2016

जीवन में खुशहाली को मजबूत बुनियाद रखें। 21 जून 2016 परिवार, समाज व देश के लिए उपयोगी बने।

विश्व योग दिवस-जन जागरुकता जन कल्याण अभियान-हिन्द का सम्मान वर्ष भर प्रातः योग विद्या अपनाओं, 21 जून को विश्व दिवस मनाओं।

  • मानव शरीर अपनी 10 इन्द्रियों समेत मुख्य पांच बल लिये बना है शारीरिक, मानसिकबल, बौद्धिकबल, मनोबल एवं आत्मबल।। योग पांचो बल का आधार है। इसका अनुसरण करना अनिवार्य है।
  • हमारे पूर्वजों में सभी बल मौजूद रहे हैं। आज की पीढ़ी का अच्छा खान-पान, सुख-सुविधाओं और आराम पर अधिक ध्यान है। जिसके चलते कई बीमारियां उत्पन्न हो चिकित्सालयों का आकार लगातार बढ़ने के साथ ही कई दवाईयां आये दिन नई बन रही है। मानव कमजोर और मशीनें ताकतवर बनती जा रही है।
  • जीवन का असली आनन्द लेना है तो प्रकृति के साथ अपना प्रतिदिन प्रातः योग करें। बड़ी खुशी से वर्ष में 21 जून को विश्व योगदिवस मनाये
धन्यवाद !
  • हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी ने संयुक्तराष्ट्र संघ में 21 जून को विश्व योग दिवस का मनाना तय करवाया है। इससे विश्व भर में हिन्दुस्तान को बड़ा आदर भाव से देखा जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी का सारा देश आभारी है।

! जय भारत माता ! ! जय हिन्द! ! जय राजस्थान ! ! जय मेवाड़ ! ! जय चित्तौड़ !






Tuesday, 7 June 2016

महाराणा प्रताप जयंती

महाराणा प्रताप जयंती, 7 जून 2016


स्वतंत्रता प्रेमी हृदय सम्राट शूरवीर प्रतापी महाराणा प्रताप के गौरवमयी इतिहास से सदा प्रत्येक हिन्दुस्तानी को प्रेरणा मिलती रहे। प्रताप के झण्डे के नीचे मेवाड़ की रक्षा और स्वाधीनता के लिए हिन्दू और मुसलमान दोनो एक होकर हल्दी घाटी के युद्ध में लड़ रहे थे।
प्रताप ने नहीं किया कभी हिन्दू-मुसलमान में भेद, रखी सदा यही टेक
हिन्दुस्तान को सब मिलकर आगे बढ़ाओ, बन हिन्दू-मुस्लिम सब एक

घर-घर यह पाठ पढ़ाओ
प्रताप के आदर्श गुण अपनाओ
मेवाड़ की माटी को सिर पर लगाओ
प्रताप की जयंती को सार्थक बनाओ
हमारे देश का एक नाम हो एक ही हिन्दुस्तान,
तब मिलेगा हमें विश्व में पूर्ण सम्मान !
जागो जागो भाई हिन्दू और मुसलमान,
चल एक रास्ते पर इस महान देश को बनाओं और महान !
! जय भारत माता ! ! जय हिन्द ! ! जय राजस्थान ! ! जय मेवाड़ ! ! जय चित्तौड़ !



Tuesday, 22 March 2016

जल दुरुपयोग रोकथाम जागरूकता अभियान

राष्ट्रीय जल दिवस 22 मार्च 2016

जल दुरुपयोग रोकथाम जागरूकता अभियान

(राजस्थान मुख्मंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के संदर्भ में)
जल ही जीवन है आत्मा-परमात्मा है, जल का नहीं करो कभी दुरूपयोग
मानवता रहेगी जिंदा तभी जब, जल की बूंद-बूंद का होगा सही उपयोग
प्रिय बधुओं,

जल देव की जय हो

  1. प्रत्येक प्राणी धरती मां पर पंच तत्व- हवा, पानी, अग्नि, पृथ्वी और आकाश से मिलकर बना है। हवा के पश्चात पानी का जीवन में सर्वाधिक महत्व है। इसीलिए कहते है अच्छा जीवन जीना है तो पेड़ लगाओं, पानी बचाओं और सुर्य (अग्नी) को नमस्कार करो। सूर्य की अग्नि से ही सभी खाद्य पदार्थ (फल) पैदा होते है व जीवन स्वास्थ्यप्रद बनता है। आधुनिक विकास की दौड़ में हम हवा और पानी को दिनों दिन जहरीला बनाते जा रहे है। अत्यधिक सुविधाओं की हौड़ में आलसी व अनैतिक बन प्रदूषण फैलाकर जीवन लीला को ही समाप्त करने का खतरा मोल ले रहे है। जल संबंधित कई अभियान केन्द्रीय/राज्य सरकार चलाती है उससे हमें जागरूक बनना जरूरी है। 
  2. जल हमारे पीने, नहाने, घरेलु कार्य, कृषि सिंचाई, उद्योग–कारखाने, ग्रामीण-शहरी विकास, बिजली उत्पादन सभी निमार्ण कार्य व मनोरंजन इत्यादि जीवन के हरेक पहेलू में उपयोग होता है। इसलिए कहते है-जल ही जीवन है एवं जल है तो कल है।'' 
  3. पुराने समय में जल की उपलब्धता कोई समस्या नहीं थी। कुएं, बावड़ी, तालाब, नदी-नालों से स्वच्छ जल उपलब्ध था। जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी, आदर्श जीवन जीने के तौर-तरीकों में कमी आई, गांव-शहरों का फैलाव हुआ व उद्योग धन्धे बढे एवं पेट्रोल-डीजल आधारित यातायात के साधन बढे जिससे प्रदूषण के बढ़ने के साथ-साथ हम आलसी बन प्राकृतिक सम्पदा के प्रति लापरवाही बरतने लगे। हमारा जीवन संकट बढ़ता गया। प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 6000 घनमीटर से घटकर 500 घन मीटर रह गई और अत्यधिक रासायनिक वस्तुओं के प्रयोग से जल दिनो दिन जहरीला होता जा रहा है। 
  4. पृथ्वी पर अथाह समुद्र जल है जो बहुत खारा व सीधे उपयोग के लायक नहीं है। बादल बन जो वर्षा से मीठा जल उपलब्ध होता है, उसे चार भागों में बांटा जा सकता है- वर्षा जल, सतही जल, (नदी-नाले, तालाब एन्क्रिट, बाँध इत्यादि), मृदा जल एवं भूजल (कुएं, बावड़ी, बोरवेल/ट्यूबवेल इत्यादि)। इन सब जल के उपयोग के बाद जो दुषित जल बनता है वो पांचवा प्रदुषित जल एक बड़ी समस्या है। 
  5. आज घर गांव-शहर से लेकर खेत-खलिहान, उद्योग कारखाने, बिजली संयत्र सभी जगह जल के दुरूपयोग एवं रासायनिक वस्तुओं के बेहद उपयोग के अलावा मल-मुत्र निपटान व साफसफाई पर हमारा ध्यान नहीं होने से जल बड़ी तेज गति से प्रदूषित हो जहरीला होता जा रहा है। बोतल बंद पानी का उपयोग करोडो रूपयों का व्यापार बन चुका है। कब तक ऐसा चलेगा। अतः हम अच्छी तरह जागरूक बन प्रत्येक पढ-अनपढ नर-नारी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जल के दुरूपयोग की रोकथाम नहीं करेंगे तो पृथ्वी पर मानव व अन्य जीवों की जीवन लीला ही समाप्त हो जायेगी। कृपया सावधान हो, आलस्य त्याग व  चिन्ता करके जल का उचित मात्रा में सदुपयोग करें तथा शासन-प्रशासन के आज के "मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान" में भी पूर्ण सहयोग दें। धन्यवाद्।

जीवन के अंधेरे को भगाने के लिए प्रकाश चाहिए, आंधी, तुफान को दबाने के लिए साहस चाहिए।
जीवन के पल-पल को सुखी बनाने के लिए प्रयास चाहिए, जन-जन का भला करने के लिए विश्वास चाहिए।