Sunday, 2 March 2014

पंचायत राज चुनाव

प्रिय बंधुओं पढ़ो-पढ़ाओ। समझो-समझाओ! जागरुक व सक्रिय बन सहयोग करो।
**पंचायत राज चुनाव का बज गया ढोल -करो उम्मीदवारो की योग्यता का मोल"
अच्छा, ज्ञानी, शिक्षित, चरित्रवान, ईमानदार, अनुशासित, परिश्रमी, खानदानी हो।
माल उड़ाने वाला भ्रष्ट, पक्षपाती, घमण्डी, लालची, शराबी, सुस्त, धोखेबाज नहीं हो
पानी पीओ छानकर अपील वोट दो जानकर
गांव की चुनो वो सरकार, जो करे ऊँचा विकास दिलाये रोजगार
(चुनाव का एक दिन बचाना और माता-पिता, बहिनों व भाईयों सब कृपया वोट डालने जरूर जाना)
हमारा लक्ष्य
"ग्रामीण आर्थिक क्रांति लाना, ऊँचे विकास की गाड़ी दौड़ाना और ईंजन मजबूत बिठाना है।
पक्षपात भेदभाव, भ्रष्टाचार, अत्याचार, वंशवाद और गांव की जनता का दुख-दर्द मिटाना है।
गांव में कोई पार्टी बाजी नहीं, किसी की आलोचना नहीं और ईमानदारी व भाईचारे का पाठ पढ़ाना है।
ग्रामीण बच्चे, युवा-जवान, वृद्ध और गरीब-अमीर, किसान मजदूर सबका जीवन सुखी बनाना है।"

पंचायत की जिम्मेदारी

  • बच्चों व विद्यार्थियों के प्रति - आंगनवाड़ी, अच्छे स्कूल, ड्रेस, किताब, योग्य शिक्षक, मीड-डे-मिल व उचित खेल मैदान की व्यवस्था बैठाना। आवश्यकतानुसार नर्सरी, प्रारंभिक शिक्षा से लेकर कम से कम उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तक का प्रबंध करना। अच्छे संस्कार पनपाना। शिक्षा केवल जीविका के लिए नहीं बल्कि जीने के लिए होती है। गांवों में शिक्षा स्तर को काफी सुधारने के जरूरत है।
  • युवाओं के प्रति - उचित रोजगार के साधन उपलब्ध कराना, सभी की प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
  • जवानों के प्रति - कृषि, व्यापार, कुटीर उद्योग व सार्वजनिक सेवा कार्यो की सफलता के लिए गांव के व्यक्तियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करना। मनरेगा सुचारू रूप से चलाना।
  • वृद्धों के प्रति- परिस्थिति के अनुसार वृद्धों की मांगों को स्वीकार कर उनकी हर सहायता करना। बुढ़ापा पेंशन को समय पर भुगतान होने में सहायता प्रदान करना। वृद्धों के प्रति आदर और सेवा की भावना को बढ़ावादेना।
  • स्वास्थ्य स्वच्छता के प्रति - गांव में योग, आर्ट ऑफ लिविंग, शौचालय व चिकित्सा व्यवस्था अच्छी बने, आशा बहिन व एएनएम अच्छा कार्य करें। स्वच्छता अभियान को लगातार गम्भीरता पूर्वक चलाया जाये।पशु चिकित्सा का भी अच्छा विकास हो। गांव की सड़क व नालियों साफ सुथरी हो। पैड़ पौधों का गांव में विकास हो।मुक्ति धामआधुनिक बनें। गोबर गैस प्लांट लगे।
  • विकास व रोजगार सुविधाएं जुटाने के प्रति - आवश्यक विकास सुविधाएँ उपलब्ध कराने में तेजी लाई जाये - बिजली, पानी, सड़क रोशनी, मिनी बैंक, चरागाह, भूमि विकास, कृषि-बागवानी विकास, पशु विकास आदि के कायों में मदद एवं विभिन्न प्रकार के रोजगार दिलाने में सहयोग करना।
  • महिलाओं के प्रति - महिला सशक्तिकरण में पूर्ण सहयोग करते हुए मानवाधिकारों को उजागर करना।
  • प्रशासन के प्रति - पंचायत अनुशासन और प्रशासन सुचारू रूप से चले। यह मूल रूप से जिम्मेदारी निभाना। जिला व ब्लॉक से बनी ग्रामीण योजनाओं को तेजी से क्रियान्वयन किया जाना। पंचायत दिवस तथा कार्यकारिणी बैठकों एवं ग्राम सभाओं का नियमित लगातार आयोजन, व्यवस्थित रूप से हों। ब्लॉक व जिला स्तर पर सभी विभागों का सहयोग लगातार लिया जाये। गांव के सभी नागरिक अधिक से अधिक इनआयोजनों में भाग लें।



Saturday, 1 February 2014

जनप्रतिनिधि जागकता अभियान

कृपया सोचे और समझे कि-विचार से कर्म, कर्म से आदत, आदत से चरित्र, चरित्र से भविष्य निर्माण

जनप्रतिनिधि जागकता अभियान

‘जनप्रतिनिधि हों ज्ञानी, हो उनमें जन सेवा की घोर ललक
सक्रिय हो रहे चरित्रवान, परहित का सोचें पाक-पलक
(सौजन्य से)
अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान
जनप्रतिनिधि वे कृपया बने जिसे गलत पैसा बनाने की नहीं हो आस और सदा दूर इस भड, चोर और बदमाश
कदम, कलम और कसम सोच कर उठाओ
फर्ज, भर्ज और कर्ज बिना तर्क तुरंत निपटाओं
आदरणीय जनप्रतिनिधीगण,
सादर प्रणाम
अति सौभाग्यवश भारत में हमारे लाखों पूर्वज ज्ञानी, परिश्रमी, त्यागी और अथाह चरित्रवान पूजनीय राष्ट्रपप्रिय महानपुरूषो के संकल्प एवं गौरव व स्वाभिमान भरे उत्तम कृत्यों से 15 अगस्त 1947 को लोकतंत्र का उदय हुआ। उनमें जो हर पलक देश सेवा की ललक बनी रहती थी वो स्नेह भावना आज के महापुरूष कहलाने वाले जनप्रतिनिधियों में पूर्ण दृष्टिगत नहीं होती दिखाई पड़ती है। हर कोई सामान्य नागरिक के मुंह से आज यही आवाज दुखी मन से निकलती है कि साहेब! चुनाव के समय प्रत्येक जनप्रतिनिधि बनने के इच्छुक आदरणीय उम्मीदवार जनता को घर-घर जाकर कई वादे करते है, पैर छूते है और जनप्रतिनिधि बनते ही सब वादे छोड़कर चाहे वे किसी पार्टी के हो वादे भूल जाते है और शासन-प्रशासन पर डरा धमका कर दबाव बना अवैध पैसा बनाने में लग जाते है। इससे विकास के हर निर्माण कार्य की दुदर्शा बनी हुई है। शिक्षा का स्तर गिरा हुआ है। नैतिकता डांवाडोल हो गई है। क्या अधिकतर ऐसे लालची माननीय जनप्रतिनिधिगण भ्रष्टाचार में भरोसा रखने वाले हमारे महान लोकतंत्र। को लम्बे समय तक सुरक्षित रख पायेंगे? इस अत्यंत महत्वपूर्ण सवाल के समाधान के लिए "जनप्रतिनिधि जागरूकता अभियान" हर स्तर पर जरूरी है जो निम्न तथ्यों पर आधारित है। कृपया जनप्रतिनिधिगण क्षमा करे की इनकोः
  1. यह कि हमारे पूर्व महानपुरूष महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष, अम्बेडकर, सरदार पटेल, रामकृष्ण परमहंस, टैगोर, विवेकानन्द, दयानंद, शास्त्री, तिलक,महावीर, बुद्ध, गुरूनानक, तुलसी, सुरदास, कबीर, रविदास, महाराणा प्रताप, मीरा, घमिनी, पन्नाधाय, शिवाजी, रानी झासी, जयनारायण प्रकाश, लोहिया, दीनदयाल, श्यामाप्रसाद मुखर्जी, भगतसिंह और एपीजे अब्दुलकलाम जैसे कई राष्ट्रप्रेमियों के कृत्यों व सर्वोच्च त्याग की स्मृतियों को तरोताजा बना कर रखना होगा तथा उनके बनायें सिद्धांतो व पदचिन्हों पर चलना होगा। इनकी तरह सभी स्तर के जनप्रतिनिधियों व शासन के दावेदारो को जनता के बीच उच्च प्रेरणादायक बनना होगा। |
  2. यह कि ग्रामीण व शहरी जीवन व जनसेवा के प्रत्येक पहलु, मुल्य व महत्व - व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामुदायिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं आध्यात्मिक रहत्य को समझना होगा। बाल, युवा छात्र-छात्राओं, महिलाओं असहाय, विकलांग, गरीब, बेरोजगार और वृद्धों का विशेष सम्मान करते हुए उनकी समस्याओं एवं कष्टों को दूर करना होगा। 
  3. यह कि चरित्रवान, परिश्रमी, ईमानदार व शिष्टाचारी बन त्याग एवं नैतिकता की भावना को अपनाते हुए प्रत्येक विकास के | विषयज्ञान की पूर्ण जानकारी प्रचलित कानुन तथा नियमों का ज्ञान रखते हुए जनसेवा में शारीरिक बल, मानसिक बल, मनोबल एवं आत्मबल का प्रयोग करते हुए सदा सक्रिय रहना होगा। किसान, व्यापारी व उद्योग वर्ग का भी ध्यान रखना होगा। 
  4. यह कि संसाधन, साधन, समयपालन, समानता, योग्यता, निर्माण कार्यो की गुणवता, सहयोग, न्याय, और जनसहभागिता का हर योजनाओं के स्थानीय लोककार्यों में संतुलन बनाये रखते हुए पर्यावरण को शुद्ध बनाये रखना होगा। 
  5. यह कि कुशल नेतृत्व को जीवन के प्रत्येक पहलु पर दर्शाना होगा। 

धन्यवाद ! जयहिन्द ! जय राजस्थान ! जय चित्तौड ।



Wednesday, 1 January 2014

जन कल्याण संबंधी सामाजिक अपील

विश्व प्रसिद्ध चित्तौड़ की ऐतिहासिक यादें क्या है?
पद-1 :- वीरता,शक्ति, भक्ति, त्याग और, बलिदान की भरी यहाँ की है शहादत ! :
गौरव और स्वच्छ पर्यावरण, हरीयाली भरी चित्तौड़ महान की सदा रही विरासत ।।
वर्तमान में नागरिकों के प्रचलित वादे क्या है ?
पद-2:- पेड़-पौधे लगायेगें, प्लास्टिक हटायेंगे, घर-गाँव-शहर का सौन्दर्य और आर्थिक गौरव बढ़ायेगें !
अच्छी शिक्षा सोच बनायेंगे, साफ -सफाई व ईमानदारी अपनायेंगे, चोरी, रिश्वतखोरी, और भ्रष्टाचार मिटायेंगे। - डॉ. भगवत सिंह तंवर

जन कल्याण संबंधी सामाजिक अपील-अभियान

-:अच्छे दिन कैसे आयेंगे:- 

देश प्रदेश के नेतृत्व से प्रार्थना !
कथनी करनी में न आने दो कोई अन्तर
राज चले अच्छा न हो धरना जन्तर मन्तर
गरीब अमीर के बीच का कम करो अंतर
करो सब फैसला जनता का दिल जीतकर
-: सौजन्य से :-
अरावली जल एवं पर्यावरण सेवा संस्थान, चित्तौड़गढ़ (राज.)
अच्छे बुरे दिनों के लिए कृपया निम्न सारणी में व्यक्ति विशेषे एवं संगठन की विशेषताएँ एवं विषमताएँ पर विचार मंथन करें !



प्रिय बंधुओं,बहनों और भाईयों,

अभिनन्दन-सादर नमस्कार!

भारत में नई सरकार आने से र्निविवाद एक बड़ा मनौवैज्ञानिक(अन्तर-आत्मा )में अच्छा सकारात्मक परिवर्तन आया है ।देशवासी मोदी सरकार से कई उम्मीदों के साथ दूरगामी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन की अपेक्षा रखते हुएँ "अच्छे दिन''आने की इन्तेजार में है। विदेशों में भारत का बड़ा मान बढ़ा है ।परिवर्तन लाना आंख मिचौली का खेल नही है। पिछले कई वषों से देश में जो सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और, राजनितिक गिरावट आई है, इनमें हिमालयन सुधार की आवश्यकता है । प्रधानमंत्री श्रीनरेन्दमोदी या प्रदेशको मुख्यमंत्री वसुंधराराजे अकेले जन भावना के अनुसार चाहे गये परिवर्तनको नहीला सकते ।यह तभी संभव है जब सम्पुर्ण जनमानस एवं देश-प्रदेश के सभी सांसद-विधायक उपरोक्त सारणी को पद-समझ सहयोगी व प्रयत्नशील बन अच्छेदिन लाने के लिए नया भारत- नया युग'की विचारधारा को सार्थक रूपर्दे सकते है।
जाति, समाज, भाषा, धर्म एवं राजनेतिक भेदभाव व अंधविश्वास तथा व्यतिगत हित से उपर उठकर देश हित में हर स्तर पर अगर हम नैतिकता, समता, बंधुता व सक्रियता से सकारात्मक भाव (Positive Thoughts) तथा वैज्ञानिक सोच रखकर बात, बहस और कड़ी मेहनत से कार्य करेंगे तो हमारे भारतवासियों के अच्छे दिन अवश्य आयेगें नहीं तो जो पिछले कई सालों से भिक्षावर्ति (अनुदान), आरक्षण पर आरक्षण, भ्रष्टाचार, चोरियां, दुर्घटना, विवादव रेलियों के दुःखद माहौल में हमारी जिंदगी ऐसे ही लड-खडाती हुई चलती रहेगी। यह भी विचारने लायक बात हैं कि भारत में कई महान विभुतियां हुई जिनके उपदेश एवं कार्य सदा मानव कल्याण में रहे, लेकिन हमने व्यतिगत स्वार्थ हेतु उन्हे पुर्ण रूप से नहीं अपनाया, जिससे''सोने की चिडिया' कहलाने वाला यह भारत महान आज विश्व में मजबूत मिठ्ठीका बनकर भी नहीं रह पाया। विचार करें।
धन्यवाद ! जयहिन्द !